Wednesday, 22 June 2016

तसलीमा आंटी को जकी अंसारी का खुला ख़त

मैडम तस्लीमा नसरीन , अस सलामु अलैकुम 
मे आप को यह खत क्यों लिख रहा हूँ इसकी खास वजह तो आप की इस खत के आखिर मैं पता चल जाएगी लेकिन पहले थोडा तार्रुफ कर लेते है ,आप का नाम मेरे लिए नया नहीं है ,इस दुनिया मै आप की जो पहचान है इस्लाम मुस्लमान और कुरान को गली देने वाले शख्स के रूप मे,आप की उसी पहचान से ही मे भी आप को जनता था ,लेकिन सोचा की आप को यह खत लिखने से पहले एक बार आप के बारे मे थोडी और पडताल कर लूँ ,नहीं नहीं मेरे पास कोई सीक्रेट सर्विस एजेंसी नहीं है मैंने तो इस काम के लिए गूगल गुरुदेव का सहारा लिया ,लेकिन कुछ खास या नया आपके बारे मे जानने को नहीं मिला,आप किया है wikipedia ने यह एक लाइन मे बता दिया ,"एंटी इस्लाम " ,अगर आप को यह लगता है की इसके अलावा भी आप की कोई पहचान है तो मे माज़रत के साथ यह कहना चाहुगा की यह आप की खुश फहमी है ,सच यही है की अगर आप किसी से भी पूछो की आप तस्लीमा नसरीन को जानते हो ? तो वह शख्स पलट कर पहले एक सवाल करता है , वही तस्लीमा नसरीन जो कुरान इस्लाम और मुसलमानो को गली देती है ,Wikipedia मे आप के ऑक्यूपेशन मे लिखा है " एंटी इस्लाम " यही आप का काम है,आप की रोज़ी रोटी इसी से चलती है , लिखा है फॉर्मल फिजिशियन, तो समझ मे आया की जब मेडिकल का काम ज़ियादा नहीं चला तो आप ने नया काम ढूढ़ लिया,जब यह पढा तो समझ मे आया की आप को औरतों पर होने वाले ज़ुल्म और नाइंसाफी से कोई लेना देना नहीं है ,यह तो आप का धंधा है ,इसीलिए तो wikipedia खुद कहता है आप का ऑक्युपेशन एंटी इस्लाम है , 1980 से पहले तक आप को कोई नहीं जनता था , ना आप की कोई पहचान थी,ना नाम लेकिन जब आप एंटी इस्लाम बन गई तो अचानक दुनिया की नज़रों मे आ गई. फिर आप को अपना देश छोड कर भागना पडा कियों की वह लोग आप को मार देना चाहते थे ,जो की मेरे हिसाब से बिलकुल गलत है ,कभी कभी हमारा पालतू जानवर हम पर ही भोकने लगता है लेकिन किया हम उसे गोली मार देते है ? नहीं ना? जब हम जानवरों के साथ एेसा नहीं करते तो आप को फिर इंसान के रूप मे हो ,ऐसा नहीं होना चहिये था ,
बहर हाल जैसे आप इस्लाम की दुश्मन है वैसे ही कुछ लोगो आप के दुश्मन है तो आप और जो आप को मारना चाहते थे एक जैसे ही है ,आप शरणार्थी बन कर कभी इस देश तो कभी उस देश मे रह रही है ,किया खूब कमल है ना मैडम,एक शरणार्थी वह है जो अभी यूरोप मे आ रहे है बेचारों के पास खाने को रोटी तक नहीं है , एक आप शरणार्थी है जो लक्ज़री लाइफ जी रही है ,शरणार्थी की ऐसी लाइफ जीने के लिए कही से तो पैसा आता होगा ? शायद यह उन्ही की महरबानी है जिनके कहे अनुसार आप इस्लाम क्रिटिक करती है ,मैंने कही पढा था आप कहती है मुस्लिम औरतों की जो ख़राब हालत है वह इस्लाम की वजह से है,आप कहती है मुस्लिम औरतों की हालत तब तक नहीं बदलेगें जब तक वह इस ओल्ड किताब कुरान को नहीं छोडेगे,मैडम किया आप एक बात जानती है ? एक क्लास मे 25-30 बच्चे होते है,सब के पास एक जैसा कोर्स होता है सब को एक ही टीचर पढता है या पढाती हे ,फिर भी कोई बच्चा 1st आता है,कोई 2nd और कोई बेचारा तो फेल ही हो जाता है ,ऐसा क्यों होता है ? इसलिए की किसी किताब या कोर्स को पढ़ना भर ही काफी नहीं होता,उसे समझना भी ज़रूरी होता है,और यह भी ज़रूरी नहीं की अगर कोई किसि चीज़ को समझना चाहे तो वह उसे समझ ही आये ,लाख समझने पर भी बहुत से लोगो को बहुत सी चीज़े समझ नहीं आती , जिन्हे समझ आती है वह समझदार हो जाते है और जिन्हे समझ नहीं आती वह किताबों और कोर्स को दोष देने लगते है वह किताबों और कोर्स को ही गलत साबित करने लग जाते है ,बदकिस्मती से आप उन्ही लोगो मे शामिल है ,इस दुनिया और इस समाज की यह सच्चाई है की औरतों पर ज़ुल्म होते है ,पुरुषप्रधान समाज ने एक ऐसा ताना बाना बुन दिया है की लाखो औरते हर रोज़ इसका शिकार होती है,एक बात बताइए मैडम मुस्लिम औरत पर ज़ुल्म हो और इस्लाम ज़िम्मेदार हो.तो हिन्दू औरत पे होने वाले ज़ुल्म के लिए हिंदुजम ज़िम्मेदार क्यों नहीं ? इस दुनिया मैं सामाजिक और पारिवारिक तोर पर अमेरिकन.यूरोपियन औरतों की हालत सब से ज़ियादा ख़राब है और यह ईसाई बहुसंखियक समाज है तो फिर उन सब के लिए क्रिश्चिएनिटी ज़िम्मेदार क्यों नहीं है ?
चलिए थोडी सी बात आप के गॉड फादर अमेरिका और यूरोप की कर लेते है ,wikipedia ने बताया की आप के पास स्वीडन की नागरिकता भी है.ईसाई बहुसंखियक यह समाज और देश ,वूमेन डोमेस्टिक वायलेंस में दुनिया मे 2nd नंबर पर आता है " In April 2009, it was reported that sex crimes had increased by 58% over the previous ten years. According to a 2009 European Union study, Sweden has one of the highest rates of reported rape in Europe.Sweden is now the RAPE capital of the वेस्ट 4 रेप एव्री डे एंड एव्री 3rd वूमेन फेस डोमेस्टिक वायलेंस ,समझ नहीं आया मैडम यह भी ओल्ड किताब को फॉलो कर रहे है किया ? 
आप अमेरिका मे है, दुनिया का सबसे पावर फुल देश जहां हर 2 मिनट मे एक औरत रेप का शिकार होती है ,हर 5 औरतों मैं से एक सेक्सुअल एब्यूज डोमेस्टिक वायलेंस का शिकार होती है ,तो हर साल 2 million यानि 20.000.00 से ज़ियादा डोमेस्टिक वायलेंस मैं इंजर्ड होती है, आपने एक नई नॉर्म सुनी होगा " सिंगल मदर " वह औरते जो अपने बच्चों की ज़िम्मेदारी खुद अकेले उठाती है ,आप का वाशिंटन पोस्ट कहता है की पिछले 50.सालो सिंगल मदर की संखिया अन्बलीवबल राइज हुई है , 9,929,000 (90 Lack ) परिवार है सिंगल मदर हैंडल कर रही है , 49 % औरतें वह है जिनकी कभी शादी ही नहीं हुई ,जो अपने पार्टनर द्वारा लिव इन रिलेशन मै चीट की गई और बच्चा होने पर मर्द छोडकर भाग गया ,तो औरत खुद अपने बच्चे को पाल भी रही है नौकरी भी करती है घर भी संभालती है ,51 % मे 20 % विधवा है बाकि वह है जिन्हे तलाक हो गया या पति से अलग रह रही है ,इनसब मे 45 % BPL है यानि below poverty line मैं है ,यानि बहुत दयनीय इस्तिथि मे अपना जीवन यापन कर रही है ,यह ईसाई बहुसंखियक समाज है , इनमे 90 % से ज़ियादा ईसाई औरते है ,मैडम किया यह भी इस्लाम की वजह से है किया ? 
मैडम जिस दौर मे आप इस्लाम को गली देकर नाम कम रही थी उस दौर तक दुनिया की रोमांटिक कैपिटल फ्रांस रेप जैसे संगीन ज़ुल्म को जुर्म ही नहीं मानती थी ,1992 मैं तो यह देश sexual-harassment पर लॉ लाया था ,किया आप मुझे बता सकती है की फ्रांस मे कौन से कुरान और इस्लाम का ज़ोर था जो यह मुल्क 1980 तक रेप जैसे घटिया काम को जुर्म ही नहीं मानता था ? 

अब थोडा सा जि़क्र जर्मनी का भी कर लेते है आप तो जानती होगी ,किसी ने कहा है की "The country moving forward in technology is actually moving really backward in humanity. " Every fourth woman in Germany is affected by domestic violence, i.e. physical and/or sexual violence of varying degrees by their current or former partner. This was shown by a representative study conducted by the Bundesministerium für Familie, Senioren, Frauen und Jugend (Ministry for Family Affairs, Senior Citizens, Women and Youth) (2004) According to German law, in order to get a conviction for sexual assault, the victim must prove that they resisted the violence..every one out of 3 women rape in Germany..this is the irony women's activists are struggling with in the wake of attacks. A quick squeeze of the breasts, a hand on the ass, an unwanted kiss — when it happens in a public space, none of these are against the law in Germany. on the street, you haven't got that. There's no law. That's a great problem for women, and women don't know it. They say, 'Wait, any man can just come and touch me and pet me and kiss me, and it's nothing?'" The German law accepts that a man generally has the right to touch a woman, to have sexual intercourse with a woman. It's his right, unless the woman shows her resistance very, very strongly," said Chantal Louis, an editor at Emma, Germany's oldest feminist magazine. "We have a situation where … even touching the breasts or vagina can’t be punished in the logic of that law, because if the perpetrator does it very quickly, you don’t have time to resist. It seems weird and crazy, but that’s German law." विकसित देशो मे इतने घटिया मापदण्ड,इन्होने भी  इस्लाम पढ़ कर यह लॉ बनाए है किया मैडम ?ओह ओह , शायद यह लोग भी छुप छुपा कर कुरान पढ लेते होगे , 
मै जनता हूँ आप जैसे मौका प्रस्त और सलेक्टिवली अटैक करने वाले लोगो के पास इन सवालों का जवाब नहीं होता ,वूमेन एब्यूज डोमेस्टिक वायलेंस इस दुनिया मे एक बहुत बडी बुराई है , पुरुषप्रधान समाज जिस तरीके से औरतों पर जुल्म करता है वह बहुत ही घटिया इस्तर की सोच का नतीजा है ,इसके लिए दुनिया का कोई भी धर्म ज़िम्मेदार नहीं है ,समाज और समाज के लोग इसके लिए ज़िम्मेदार है , लेकिन आप जैसे लोगो को समाज की परेशानियों से कोई लेना देना नहीं है ,आप की दुश्मनी एक खास धर्म से है और इस दुश्मनी मै आप इतने निचले इस्तर पर आ गई है की अब उन लोगो को भी गली देने लगी है जिन्हे ना तो आप जानती है और ना पहचानती है ,पिछले दिनों आप का एक टवीट पढा आपने लिखा था "Why should I fast? I am not stupid." मतलब की मै रोज़ा क्यों रखु मे बेवकूफ थोडी हूँ " तो इसका मतलब आप यह कहना चाह रही है की जो लाखो करोडो लोग रोज़ा रखते है वह बेवकूफ है,जी हां मैडम एक बस आप ही समझदार है बाकि सारे बेवकूफ है , मैडम इस दुनिया मे जितने भी बुध्धि जीवी हुए है उनसब का कहना है की इस दुनिया का सबसे बडा बेवकूफ इंसान वह है जो अपने आप को समझदार और बाकि सब को बेवकूफ समझे ,और यह बेवकूफ एक मानसिक रोगी की तरह होते है ,जैसे आपने किसी मानसिक रोगी को देखा हो या कभी आइना देखा हो ,एक मानसिक रोगी हमेशा यही कहता है की मै मानसिक रोगी थोडी हूँ ,हद तो यह है की वह डॉ तक को बोलता है तुम मानसिक रोगी हो मैं नहीं ,इसी तरह के यह आप जैसे समझदार होते है जो चीख चीख कर बोलते है i am not stupid. मैं आप के टवीट देख रहा था ,किसी ने आप से पूछा था आप का धर्म किया है , इस्लाम, हिंदुजम क्रिश्चैनिटी ? तो आप ने रिप्लाई दिया हुमानिजम,(Humanism)मुझे यह समझ नहीं आरहा की यह आप का केसा हुमानिजम (Humanism) है जो आप को करोडो लोगो की आस्था को गली देने पर मजबूर करता है ? यह समझ नहीं आया की यह आप का केसा हुमानिजम (Humanism) है जो आप को यह घमंड करने पर मजबूर करता है की बस एक आप समझदार हो बाकि करोडो लाखो लोग बेवकूफ है ? समझ नहीं आया यह केसा हुमानिजम (Humanism) है जो उन करोडो लाखो लोगो को निचा दिखना चाहता है जो अपनी मर्ज़ी अपनी आस्था अपनी समझ अपनी ज़िम्मेदारी के साथ अपने फज़ृ को निभाना चाहते है ?मैडम अगर यह आप का हुमानिजम (Humanism) है तो आप को इस हुमानिजम (Humanism) पर शर्म आनी चाहिए आप का यह हुमानिजम (Humanism) भी लोगो पर ज़ुलम कर रहा है जब आप खुद ज़ालिम है तो फिर आप को इस्लाम पर ऊँगली उठने का किया हक ,इंसान की फितरत अगर ज़ालिम की हो तो फिर वह चाहे किसी भी धर्म का हो ज़ुल्म कर देता है ,आप हुमनिजम (Humanism) वाली बन गई फिर भी लोगो को बेवकूफ कह कर निचा दिखा रही है यह भी ज़ुल्म ही है मैडम,बेहतर हो की यह हुमानिजम (Humanism) आप से शुरू हो कर आप पर ही ख़त्म हो जाये वरना ना जाने कितने और घमंडी बेवकूफ इस दुनिया को झेलने पडेगें ,

आपने लिखा " मे रोज़ा क्यों रखु मे बेवकूफ थोडी हूँ " आपने बिलकुल सही कहा मैडम , रोज़े का मतलब सिर्फ भूका पियासा रहना ही नहीं होता ,रोज़े के लिए अक़ीदे की हिम्मत ,सबर का हौसला और ईमान की गर्मी का होना ज़रूरी है , जब आप इन चीज़ो से वाकिफ ही नहीं तो काहे का रोज़ा,भूके मर कर बेवकूफ क्यों बनना ,हर इंसान अपनी हैसियत बहुत अच्छी तरह से जनता है ,आप भी अपनी हैसियत जानती है ,आप को खुद पता है की आप अगर रोज़ा रख भी लो तो वह भूके मरने से ज़ियादा कुछ नहीं होगा तो फिर भूके मरने से किया फायदा ,सही करती है आप , आप समझदार है ,बल्कि मे तो यह कहूंगा की आप बहुत ज़ियादा समझदार है ,

कुछ महीने बाद हमारे देश मे नव रात्रे शुरू होगे इन दिनो हमारे हिन्दू बहन भाई व्रत रख कर अपनी आस्था निभाते है , मुझे उम्मीद है आप उस वकत यह टवीट करके उनकी आस्था को ढेस नहीं पहुंचाएगी की " मे व्रत क्यों रखु ,मे बेवकूफ थोडी हूँ " या नाही ईसाई फास्ट के दौरान भी ऐसा बोल कर हमारे ईसाई बहन भाईओं की आस्था को गली देंगी। 

वाकई अगर समाज की परेशानियां देख कर तकलीफ होती है तो बुराइओं से लडिये ,किसी धर्म को अपना दुश्मन मत बनाइये नहीं तो एक दिन आप की हालत हमारी हिंदी के एक कहावत की तरह होगी 
"धोबी का ......... , घर का ना घाट का "
अल्लाह हाफिज !!!
Mohammed Zaki Ansari

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