Monday, 11 July 2016

इस्लाम आलमी भाईचारा और ईसिस आलमी दुश्मनी

इस्लाम यह विश्व में फैला हुआ मजहब है. और इस्लाम आलमी भाईचारे को मानता है. मतलब दुनिया का हर वह अमन पसंद इंसान दुसरे का भाई है यह इस्लाम कहता है. इस विश्व के सबसे बहेतारिन भाईचारे को ख़त्म करने के लिए ईसिस का जन्म हुआ. अगर ईसिस इस्लाम के समर्थन में होते तो वह इस्लामी मुल्को में नहीं बल्कि गैर इस्लामी मुल्को में खून खराबा करते. इस्लाम से आतंकवाद का कोई लेना देना नहीं यह हर कोई अच्छी तरह से जानता है लेकिन इस्लाम को बदनाम करने वाले लोग अरबो रुपये खर्च कर रहे है इस्लाम को बदनाम करने के लिए. गर ईसिस इस्लामिक आतंकवादी संगठन होता तो इस्लाम के दुश्मनों को अरबो रुपये खर्च करने की जरुरत ही नहीं पड़ती वैसे भी ईसिस पूरी ताकत से इस्लाम को बदनाम करने में जुटा है. 
http://www.upuklive.com/2016/05/rss-funding-for-isis.html


इस्लाम में सलाम का तरिका विश्व में सबसे बहेतर माना गया है कई मुस्लिम विरोधियो ने भी इसका समर्थन किया है सलाम यानी “ अस्सलाम वालेकुम” का मतलब है “सलामती हो आप पर” इन शब्दों में किसी भी मजहब के देवी देवताओं या किसी भी मजहब को ऐतराज हो ऐसा कोई शब्द नहीं है. और जब दुनिया का कोई भी इंसान दुसरे मुसलमान से मिलता है तो उसके सलामती के लिए दुआ करता है. इन खूबसूरत विचारों से प्रेरित होकर केवल 1441 वर्ष में इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा दूसरा धर्म बना हुआ है. वरना पांच दस हजार से प्रचारित प्रसारित किये जा रहे मजहब सिमित मुल्को में पाए जाते है. (इसका मतलब यह नहि की वह मजहब गलत है, प्रचार करने वालो का तरिका या विचार गलत हो सकता है, कोई भी मजहब गलत नहीं सिखाता) तेजी से फैलते मजहब पर ऐसे रोक लगाना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन भी है इसलिए सोशल मीडिया पर या बिकाऊ मीडिया में इस्लाम और मुसलमानों के बारे में अपप्रचार का सिलसिला बढ़ता जा रहा है.
http://wp.me/p5H5wa-em8


अगर गौर किया जाए तो यह पता चलता है की ईसिस द्वारा सबसे ज्यादा नुक्सान जहां भी हुआ वह मुस्लिम देशो में हुआ और जिसका भी हुआ हो तो वह है मुसलमान. क्यूंकि ईसिस तो इस्लाम के दुश्मनों ने बनाया हुआ एक षडयंत्र है जो इस्लामी मुल्को और मुसलमानों को नुक्सान पहुंचा रहा है. और हजारो बेगुनाहों का कत्लेआम कर रहा है. ख़ास बात तो यह है की, जब हिटलर ने साठ लाख लोगो का क़त्ल किया जो उसका इल्जाम उसके मजहब को नहीं बलके उसका दोषी हिटलर को हि बताया गया. जबके जू धर्म के अनुसार उसने साठ लाख लोगो को मौत के घाट उतारा था. हाल ही में इजराईल ने खुद कुबूल किया की सीरिया का कत्लेआम करना उनके यहूदी धर्म के अनुसार अनिवार्य है. लेकिन इस कत्लेआम का यहूदियत पर इल्जाम नहीं लगाया जाता बल्कि राजनैतिक मामला कहकर पल्ला झाड़ा जाता है. हाल ही में हुए बंगलादेश के आतंकवादियों ने कुरआन की आयते जिसको पढ़ना नहीं आता ऐसे लोगो को क़त्ल किया ऐसा मीडिया ने बवाल मचाया था. लेकिन भारत के लोग यह्भूल गए है की, भारत में कुल मुसलमानों की आबादी के अरबी जानने वाले केवल 25 प्रतिशत ही लोग है. तो इसका मतलब के ईसिस के लोग उन 75 प्रतिशत लोगो को गैरमुस्लिम समझकर मार देंगे ? जी हाँ उनको तो बस इस्लाम को बदनाम करना है बंगलादेश में मरने वालो और मारने वालो दोनों में भी मुसलमान शामिल थे. अगर मरने वाले मुसलमान भी थे तो फिर यह इस्लामिक आतंकवादी संगठन कैसे हुआ ? और मारने वालो में भी गैरमुस्लिम थे तो फिर इस्लामिक आतंकवादी संगठन में गैरमुस्लिम क्या कर रहे थे ? ऐसे कई सवाल है. लेकिन कुल मिलाकर ईसिस जैसे लोग सबसे पहले इस्लाम के दुश्मन है और फिर इंसानियत के दुश्मन है. इसलिए मुसलमानों का फर्ज बनता है की आतंकवादियों का परदाफाश करे और ईसिस का कडा विरोध करे.

हर बार इस्लाम के दुश्मनों ने इस्लाम विरोधी चली हुई चाल उल्टी पद गयी है. जब भी इस्लाम के खिलाफ कोई चाल चली जाती है तो इस चाल में चाल चलने वाले ही फंस जाते है. और इस्लाम तेजी से फैलता जाता है. और इस्लाम अपने आप में एक सच्चा मजहब होने के कारण विश्व विरोध के बावजूद सबसे ज्यादा तेजी से फ़ैलाने वाला मजहब बनकर उभरा है.


निचे कुछ लिंक दे रहा हूँ जो विभिन्न अखबारों और वेब पोर्टलो में प्रकाशित इस्लाम विरोधियो के नकाब उठाती है.
अमरीका में मुसलमानों के प्रति नफरत के लिए करोड़ों डालर किये गए ख़र्च
http://www.kohraam.com/…/muslim-and-islamphobia-in-america-…
74 संगठनों ने मुसलमानों के खिलाफ नफरत पैदा करने के लिए लगभग इक्कीस करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। CAIR-CRG-IRDP रिपोर्ट के अनुसार 5 वर्ष के दौरान इस्लाम और मुस्लिम विरोधी मामलो की तादाद में अचानक वृद्धि होने के पीछे यही बड़ा कारण रहा है ।
http://www.worldnewshindi.com/…/74-organizations-had-appli…/
जानिए इस्लाम की छवी को ख़राब करने के लिए चलाया जा रहा है ऐसे अभियान - कई देशो में ऐसे बहुत से समूह हैं जो मुसलमानो को इस्लाम की हकीकत से दूर रखने के लिए काम कर रहे और आपस में लड़वाने का भी काम कर रहे हैं.
http://www.worldnewshindi.com/…/learn-to-tarnish-the-image…/
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बांग्लादेश में हिन्दुओ पर हमलो में भारत के हिंदूवादी संघठन का हाथ हो सकता है :बांग्लादेश खुफिया एजेंसी 
http://headline24.in/…/bangladesh-aency-blame-rss-behind-h…/
जानिए क्या सच्चाई : आर एस एस तो नहीं बंगलादेश में हिन्दू पंडितो की हत्या के पीछे ???
http://www.januday.com/NewsDetail.aspx?Article=8743
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जाकिर नाइक को आतंकी बताने के लियें RSS ने पूरी भारतीय मीडिया को मैदान में उतारा
http://bit.ly/29zlaR7
ज़ाकिर नाईक का करारा जवाब: दुनिया भर में उनके हज़ारों समर्थक और फॉलोअर्स हैं। हमलावर मुझे जानते हैं ये जानकर क्या मुझे हैरानी होनी चाहिए थी? …नहीं। वह आतंकियों के तरीके का समर्थन नहीं करते।
ज़ाकिर नाईक ने ढाका की अफवाह का दिया करारा जवाब – ‘2 करोड़ से ज्यादा लोग मुझे जानते हैं, हमलावर भी मुझे जानते होंगे’
http://bit.ly/29is4rf
हमें ज़ाकिर नाइक से कोई मतलब नहीं है और नाही उनमे कोई इंटरेस्ट है।। ये देश का माहौल खराब करने और साम्प्रदायिकता फैलाने के लिए हो रहा है।। क्या ज़ाकिर नाइक ISIS को बढ़ावा देता है?? वीडियो देखिये जान्ने क लिए।।
https://www.facebook.com/IamWithRavishKumar/videos/1742300779376722/

 सबसे आखिर में एक बात, मुसलमान उसी को कहते है जो कुरआन को मानता है, अल्लाह पर जिसका ईमान है. अल्लाह का हुक्म है.
"लाकद काना लकुम फी रासुलुल्लाही उसवत-उल-हसना"
अर्थ- ई लोगो मैंने तुम्हारे लिए मुहम्मद पैगम्बर (स) की जिंदगी को आइडियल और मॉडल बया है.
अब हमको वाही करना है जो मुहम्मद पैगम्बर (स) ने किया हो, रही बात बेगुनाहों के क़त्ल की तो मुहम्मद पैगम्बर (स) ने अपनी जिंदगी में किसीको छोटीसी तकलीफ भी नहीं दी.......
-अहेमद कुरैशी-

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