Saturday, 9 July 2016

फिरकापरस्ती मुसलमानों को ले डूबेगी, नादानों

मुसलमानों को ले डूबेगी फिरका परस्ती, ऐसे हालात आज सामने आरहे है की जिसकी हर किसीको फ़िक्र होगी, देश के साथ साथ सारी दुनिया के लोग एक तरफ डॉक्टर जाकिर नाईक के समर्थन में सिर्फ इसलिए खड़े हो रहे है की, वह एक मुस्लिम विद्वान है और मनुवादियों द्वारा उनको साजिश कर फंसाने की तयारी की जा रही है. लेकिन कुछ बे अक्ल फिरकापरस्त लोग अनजाने में आरएसएस जैसी मुस्लिम विरोधी संग्थानाओ का साथ दे रहे है. यह लोग खुद को मुसलमान बता रहे है और ऐसी ऐसी गन्दी बाते कर रहे है जो इस्लाम ने जिसको सख्त मना किया है. इस्लाम ने हिन्दू तथा गैरमुस्लिम को गाली देने और उनके इबादतगाह (मंदिर, चर्च, स्तूप) को नुक्सान पहुंचाने के लिए भी मना किया है. लेकिन कुछ अंधे फिरकापरस्त लोग जाकिर नाईक का विरोश कर इस्लाम के दुश्मनों का डायरेक्ट समर्थन कर रहे है. शायद इसीलिए कुरआन में सुरह बकरा में अल्लाह सुबहानाऊ ताआला ने फरमाया के वह लोग गूंगे है, बहरे है, अंधे है. और एक जगह अल्लाह सुभानाऊ ताआला ने कुरआन में एक जगह फरमाया के


"मैं युम्हे नहीं रोकता उनके साथ दोस्ती करने और उनके साथ न्याय (इन्साफ) करने से, जिन्होंने तुम्हे अपने घरो से नहीं निकाला और जिन्होंने तुम्हारे इस्लाम के खिलाफ जंग नहीं की. (अल-कुरआन/ 60:8)

यह आयत से साफ़ समझमे आता है की, डॉक्टर जाकिर नाईक ने इस्लाम के खिलाफ जंग नहीं छेदी और ना ही मुसलमानों को अपने घरो से निकाला. यह सब करने वाले तो आईएस के आतंकवादी है. तो कुछ महामूर्ख लोग आईएस जैसे इस्लाम विरोधी इंसानियत विरोधी संगठन का विरोध करने के बजाये डॉक्टर जाकिर नाईक का विरोध कर रहे है. औए आरएसएस में मुस्लिम मंच के बैनर टेल लोगो को मौत की खाई में धकेल रहे है. सब जानते है आरएसएस मुसलमानों का खुला दुश्मन है. फिरभी अनजान बने है कुछ मुर्ख लोग.


आज के तारीख में इस्लाम को बदनाम करने वाली ISIS यहूदी संगठन का कडा विरोध करना बहुत जरुरी है. जिसकी वजह से लाखो बेगुनाहों का क़त्ल किया जा रहा है. और यहूदी गैरमुस्लिमो में मुसलमानों के खिलाफ नफरत का झर घोलने में कामियाब हो रहे है. इनका (isis) कडा विरोध कर मुसलमानों ने यहूदियों की चाल का पर्दाफ़ाश करने की जरुरत है लेकिन कुछ बेवकूफ मुसलमान है जो ईसिस को छोड़कर जाकिर नाईक का विरोध कर रही है......... बेहद अफसोसनाक बात है.

यूपीयूके लाइव इस न्यूज पोर्टल ने फिरकापरस्ती मुसलमानों को ले दुबेगी इस विषय पर एक खबर प्रकाशित की है. वह आपको निचे दे रहे है.


मंफात एक है इस कौम की, नुकसान भी एक,
एक ही सबका नबी (सल.), दीन भी, ईमान भी एक।
हरम-ए-पाक भी अल्लाह भी, कुरआन भी एक,
कुछ बड़ी बात थी होते जो मुसलमान भी एक।
फिरकाबंदी है कहीं और कहीं जातें हैं,
क्या जमाने में पनपने की यहीं बातें हैं।

इकबाल का यह शेर आज के दौर में आम हो चुकी फिरकापरस्ती को आईना दिखा रहा है। इसी फिरकापरस्ती का फायदा उठाते हुए कई करेप्ट नेता अपने राजनैतिक सरोकार पूरे कर लेते हैं। इस सब में नुकसान है तो सिर्फ और सिर्फ बेचारे मुसलमानों का। इस बात को अगर हम अभी नहीं समझे तो शायद आने वाला कल हमारे ही दरम्यां दीवारें खड़ी कर देगा। इख्तलाफ तो बाप-बेटे, भाई-बहनों में भी हो सकता है, लेकिन इसे फिरके का रूप दे देना समझदारी नहीं का जा सकता।

फिरकापरस्ती एक ऐसी बुराई है जो मुसलमानों की जड़ों को खोखला कर रही है। सिर्फ चंद इख्तलाफों के कारण आज का मुसलमान अपने मुस्लिम भाई को सलाम करना बंद कर रहा है। यहां तक कि कई बार तो नमाज-ए-जनाजा तक में शरीक न होने का कारण अलग-अलग मसलहक होना पाया जाता है। हमें सोचना चाहिए- क्या यही हमारे नबी करीम (सल.) की तालीम है? क्या इस्लाम हमें यही सिखाता है?


इस्लाम में तो गैर-मुस्लिम से भी नफरत करने का हुक्म नहीं, फिर अपने मुस्लिम भाईयों से चंद इख्तलाफ को लेकर नफरतें करना भला कहां सही हो सकता है? मुसलमानों के बीच दीवार खड़ी करने का मंसूबा रखने वाले ही कुछ लोग दीन के नाम पर मुसलमानों को आपस में ही लड़ने-मरने को भड़का रहे हैं, जिसका खामियाजा भी हमें भुगतना पड़ा रहा है।

लेखक अली सोहराब अपने विचार कुछ इस तरह से रखते है जो डंके की चोट पर कहते है .....
अली सोहराब
जब ‪#‎डॉ_विनायक_सेन‬ को हाई कोर्ट ने ‪#‎देशद्रोही‬ घोषित कर जेल में डाल दिया था तब भी काका समेत पूरी काका-मंडली ने अदालत के फैलसे का विरोध किया था और ‪#‎विनायक_सेन‬ को सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी मिला।

काका ने कभी भी ‪#‎मिलाद_उन_नबी‬ नहीं मनाया, कभी भी मिलाद का झंडा अपने घर पर नहीं लगाया फिर भी दौसा (राजस्थान) में एक घर पर मिलाद का झंडा लगने पर जैसे ही ‪#‎दैनिक_भास्कर‬ ने पाकिस्तानी झंडा लिखा काका समेत पूरी काका-मंडली ने विरोध किया और पत्रकार गिरफ्तार भी हुआ,


आज ठीक उसी प्रकार ‪#‎ज़ाकिर_नाईक‬ के साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध ‪#‎नाईक‬ का समर्थन भी केवल अन्याय के विरुद्ध अपने आपको रखना मात्र है, न की ‪#‎ज़ाकिर‬ से पूर्णरूप से सहमत होना।

आप सरकारी ‪#‎मोली_साहब‬ के साथ ‪#‎डॉ_नाईक‬ से अपनी मसलकी खुन्नस मिटाते रहिये, काका कल भी अन्याय के विरुद्ध थे आज भी हैं और कल भी रहेंगें।
‪#‎WeStandWithDrZakirNaik‬
‪#‎काकावाणी‬


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