Tuesday, 30 October 2018

बदलते भारत का जनक इस्लाम

यदि आप खजुराहो के मंदिर की कृतियां देखे य़ा मंदिर, या फिर अजन्ता-एलोरा की गुफा देखेंगे तो भारत में अापको इस्लाम के आने से पहले की संस्कृती का अंदाजा हो जायेगा ! आइए जानते हैं इस्लाम के आने से पहले क्या थी भारत की संस्कृति !


गे और लेस्बियन तो छोटी बात है मनुष्यों की जानवरों से संभोग करती तस्वीरें अापको मिल जायेंगी ! कामसूत्र जब यहाँ से लिखा गया तो दुनिया के पास ऐसी कोई पुस्तक नही थी ! हिंदू धर्म ग्रंथो में गे और लेस्बियन का न मात्र उल्लेख है अपितु उन्हें शिव का आशिर्वाद प्राप्त करते दिखाया गया है ! - वेदों में बड़े देवता वरुण और मित्रा के अंत्रंग संबंधों का वर्णन है,  - वेद के सबसे बड़े भगवान अग्नी के समान एवं शिव के वीर्य चाटने की कथाएँ हैं,

- अग्नी के शिव के वीर्य का मुखपान करने से कार्तिकिये के जन्म का वर्णन है ! परंतु यह सब तेरहवीं शताबदी के पहले का है !

 
इस्लाम_के_आने_के_बाद_का_भारत
- भारत में इस्लाम के प्रादुरभव के साथ ही आम जन-मानस पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा,
- लोगों में शरीर पूर्ण रुप से ढ़कने का प्रचलन शुरू हुआ !
- स्त्रियों में दुपट्टा ओढ़ने का रिवाज आया तो वहीं कहीं-कहीं महिलाओं में घूंघट ओढ़ने का भी रिवाज बढ़ा, जोकि मुस्लिमों के बुर्के से प्रभावित था !
- पुरूषों ने भी उपर के तन को ढ़कना शुरू किया, स्त्री-पुरूष के आंतरिक संबन्धों के नियम कड़े हुए !

 
1947_के_बाद_का_भारत
- अंग्रेजों के आ जाने और पाकिस्तान के अलग हो जाने से 1947 से भारत पर इस्लाम का प्रभाव क्रमश: घटता गया पर 1947 के बाद बने कानून में "गे" संबन्धों पर 10 साल के दंड़ का प्रावधान किया गया !
- सदियों तक भारत पर प्रभाव ड़ालती इस्लामिक संसकृती से बनी मानसिकता का ही परिणाम था कि खजुराहो संसकृती पीछे जा चुकी थी !
- 70 सालों में धीरे-धीरे कर के भारत से इस्लाम का प्रभाव अब समाप्त हो गया है और भारत पुन: उसी संस्कृती की ओर अग्रसर है !

अंधभक्तों_का_भारत
- भारत उसी योनि अंगों की ओर प्रमुखता से अग्रसर हो रहा है,
- समलैंगिक संबंध जिन्हें हेय दृष्टि से देखा जाने लगा था आज फिर से कानूनी मान्यता मिलने पर निर्लज्जता के साथ समाज में रोग की भांति फैलने लगी है !
- इसके अलावा पत्नी का किसी गैर पुरुष से संबंध और पति का गैर पत्नी के साथ संबंध अब नाजायज न कहला कर आत्मसंतुष्टि का पर्याय बन गया है !
- यही हाल रहा तो नियोग और एक स्त्री पर चार पांच पुरुष या पूरा झुंड कानूनन सही ठहरा दिया जाएगा,
क्योंकि कानून भी अब सत्ता की स्याही से लिखा जाने लगा है !

No comments:

Post a comment