Sunday, 29 March 2020

काश ये लोग भी रामायण देखकर अपनी भूख और पीड़ा मिटा पाते

Ramayana in homes, Mahabharata on the streets
काश ये लोग भी रामायण देखकर काम चला पाते ..
UP के नौकरशाह कंफ्यूजड है। लॉकडाउन और उसके बाद की क्राइसिस संभालने में उनकी अक्षमता सामने आई है। किसी भी विषय का आकलन ही नहीं किया। हजारों लोग सड़क पर आ गए तो अफसर शुतुरमुर्ग हो गए। सारा दिन सिर्फ मीटिंग करते है. जनता को हुक्म, घर पर रहो । 2 वक्त की रोटी कहा से आएगी ?


सरकार से एक चूक हो गई है। हाईवेज़ के किनारे बड़े बड़े LED स्क्रीन लगाए जाने चाहिए थे ताकि सैकड़ों KM अपने घर को पैदल लौटते ये मज़दूर रामायण देख कर अपनी भूख और पीड़ा मिटा पाते। अब भी देर नहीं हुई है। चुनावी रैलियों में बड़ी स्क्रीन लगाने वालों से कंटैक्ट कर ये काम फ़ौरन किया जाए।
क्या अच्छा नहीं होता कि रेल को पूरी तरह रोक देने की बजाय स्टेशनों पर समुचित तैयारी/व्यवस्था कर इन्हें घर जाने दिया जाता? स्टेशनों पर तो इनको फिर भी नियंत्रित किया जा सकता था, अब खुले में कैसे नियंत्रित करोगे? कोरोना+ वालों को ट्रेन से उतार लेते थे पर इनमें कोई हुआ तो क्या?

twitter यूजर क्या बले ?

अब इसमें ‘संशोधनों’ का सिलसिला शुरू हुआ है। ये नौबत न आती अगर पहले सोते न रहते और फिर ‘आज कुछ तूफ़ानी करते हैं’ जैसी रोमांचकारी मनोदशा में फ़ैसला न लेते। समय से तैयारी शुरू करते और फिर #देशबंदी करते।


Rahul Gandhi
सरकार इस भयावह हालत की ज़िम्मेदार है। नागरिकों की ये दशा करना एक बहुत बड़ा अपराध है। आज संकट की घड़ी में हमारे भाइयों और बहनों को कम से कम सम्मान और सहारा तो मिलना ही चाहिए। सरकार जल्द से जल्द ठोस क़दम उठाए ताकि ये एक बड़ी त्रासदी ना बन जाए।Rahul Gandhi

4 घंटे के नोटिस पर देशबंदी घोषित करने कि बजाय थाली पीट समारोह से पहले घोषणा कर देते तो ना ही लाखों लोगों को सपरिवार दिन रात जान जोखिम में डालना पड़ता और ना ही मुख्यमंत्री को रात भर जागना पड़ता

Rohini Singh
बाल्कनी से थाली बजाने के लिए- 72 घंटे का टाइम। ANI की टीम के साथ रिहर्सल करने के लिए हर अपार्टमेंट की मैपिंग होती है। कमिटी बनती है। राष्ट्रीय आयोजन बनता है। गरीबों के घर जाने के लिए-
3 घंटे का टाइम। कोई रिहर्सल नहीं। कोई मैपिंग नहीं। कोई ANI नहीं। कोई राष्ट्रीय प्रयास नहीं।


Laxmi Prasad Pant
प्रधानमंत्री @narendramodi जी....
समय रहते सरकार को भारतीय रेल के डिब्बों को अस्पताल के रूप में तैयार करना चाहिए, क्योंकि इनमें बेड भी है, टॉयलेट भी, और चलायमान भी, खर्चा भी कम आएगा, चारों तरफ तैयार करके मेडिकल टीम की तैनाती कर देनी चाहिए।

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