Monday, 25 May 2020

सिर्फ ईद की मुबारकबाद नहीं ? मुसलमानों से माफी भी मांगिये- विक्रम चव्हाण


देश के हर मुद्दे पर एक मुसलमान ढूढ़ लिया जाता है । मुसलमान नहीं मिलता है तो मुसलमान नाम वाला ढूढ़ लिया जाता है । अगर नाम नहीं मिलता है तो मुस्लिमों जैसा दाढ़ी वाला ढूढ़ लिया जाता है । मगर मुसलमानों का कुछ चाहिए ही चाहिए ।

सिर्फ ईद की मुबारकबाद नहीं ? मुसलमानों से माफी भी मांगिये
सिर्फ ईद की मुबारकबाद क्यों , माफी भी तो मांगिये मुस्लिमों से. मैं फेसबुक में दस साल से हूं. मेरे निजी जीवन के अधिकतर मित्र मुस्लिम हैं । मेरे फेसबुक के अधिकतर मित्र मुस्लिम हैं । यह मैंने खुद तय किया था कि देश का अल्पसंख्यक समुदाय मेरे फेसबुक में बहुसंख्यक होगा । शुरू में जब कॉलेज में था, तब भी मुस्लिम मेरे मित्र थे । एक अंकल शकूर जिनके घर हमारे घर से दूध जाता था, वे खुद हमें सेवइयां देने घर तक आते थे । मेरे पिता जी के दिये शिक्षा ने बचपन में ही हम भाइयों को सीखा दिया था कि सब धर्म एक हैं । किसी से आप स्पेशल नहीं न कोई आपसे छोटा, उसी शिक्षा को मैं बड़ा होते गया और अपने अंदर आत्मसात करते गया । आज जब देखता हूँ देश को, आसपास लोगों को तो लगता है कमी इन युवाओं के माँ -बाप में ही रह गई थीं ।

व्हाट्सएप पर बड़े -बड़े उच्च शिक्षित अधिकारियों का, प्रोफेसरों का पिछले दिनों लगातार मैसेज आता था मुस्लिमों ने कोरोना फैलाया, जमातियों ने कोरोना फैलाया । वही लोग ईद की बधाई भी दे रहे हैं । मैं तो उनके नाम भी उजागर कर देना चाहता हूँ कि इनका चेहरा दुनिया देखें पर शर्मिंदा न हो इसलिए नहीं लिख रहा हूं । यह सिर्फ एक मौका नहीं है मुस्लिमों के खिलाफ दुष्प्रचार का, भारतीयों ने गोदी मीडिया के मुस्लिमों के विरुद्ध फैलाये अफवाहों को हाथोंहाथ लिया है । कश्मीर, तीन तलाक से लेकर जामिया तक. सीएए से लेकर दिल्ली दंगों तक. हमेशा मुस्लिमों को ही टारगेट करते रहें लोग । आप देखिए गुजरात दंगों से लेकर आज तक. हमने मुस्लिमों के लिए क्या किया? एक सच्चर कमेटी की रिपोर्ट तो लागू नहीं कर पाए । मॉब लिंचिंग में मारा जा रहा है सैकड़ों मुसलमान फिर भी देश की बर्बादी के लिए मुसलमान जिम्मेदार! देश के हर मुद्दे पर एक मुसलमान ढूढ़ लिया जाता है । मुसलमान नहीं मिलता है तो मुसलमान नाम वाला ढूढ़ लिया जाता है । अगर नाम नहीं मिलता है तो मुस्लिमों जैसा दाढ़ी वाला ढूढ़ लिया जाता है । मगर मुसलमानों का कुछ चाहिए ही चाहिए । अंत में हरा रंग भी चलेगा! अरे जान तो दे ही रहा है मुसलमान, और क्या चाहिए? यहां लोग लिख रहे हैं ईद मुबारक, ईद मुबारक. बेचारे सीधे सादे मुसलमान प्रेम से बधाई दे रहे हैं, भाई आपको भी ईद की मुबारकबाद.
बताइये हम जिम्मेदार हैं उस गरीब अफ़राज़ूल का जिसे शम्भूनाथ ने जलाकर मार दिया । क्या हमने उस गरीब के परिवार का पता ढिकाना लिया, उसकी मदद की? उस परिवार का आज का ईद कैसा मन रहा होगा? मोहम्मद अखलाक, जुनैद खान, पहलू खान सहित उन 134 मुस्लिम परिवार का ईद कैसा मन रहा होगा जिनके घर के बच्चे, जवान, बूढे मॉब लिंचिंग में मारे गए । क्या 134 हिंदुओ की मॉब लिंचिंग होती तब भी देश इतना शांत रहता? अभी दिल्ली दंगो से तार जोड़ते हुए जामिया की छात्रा गर्भवती सफूरा को यूएपीए लगा जेल में ठूस दिया गया है । कश्मीर तो नरक ही बन गया है । मोदी शासन में कितना लिखें, कितना बताएं .मुस्लिमों पर लोकतांत्रिक भारत में अत्याचार विषय पर तो चार वेदों से बड़ा ग्रंथ बन जायेगा । पर शर्म हमें नहीं आती. बुरा लगेगा आपको सुनते हुए पर सुनिए अगर आप नहीं चाहते तो कोई मोदी मुस्लिमों का बाल बांका नहीं कर सकता था ।

अब आये हैं ईद की बधाई देने के लिए, मत बनिये मसीहा । न दलितों का, न आदिवासियों का और न मुस्लिमों का. दलित अपने मसीहा अपने बीच ढूढ़ लेंगे । आदिवासी अपना मसीहा अपने बीच ढूढ़ लेंगे. मुस्लिमों का मसीहा भी उनके बीच का होना चाहिए । चीथड़ों में तो हो गया है देश का मुसलमान. हम अपराधी हैं । उनके. बहुत बड़े अपराधी. हम सिर्फ कट्टर हिन्दुओं और उनके आकाओं को जिम्मेदार ठहरा बच नहीं सकते. हमारी चुप्पी ही हमारा अपराध था । मुँह खोलिए मुसलमान के लिए मुसलमान सा होकर. तभी देना ईद मुबारक. ईद मुबारक दोस्तों!

लेख में कांग्रेस का पाप रह गया था. जिसने सिमी ,इंडियन मुजाहिदीन के नाम पर सैकड़ों बेगुनाह मुस्लिम युवाओं को जेल में डाला. जो कोई 20 साल बाद,16 साल बाद,12 साल बाद बाइज्जत बरी होकर जेल से निकले.ये कांग्रेस का हिडेन एजेंडा था. मुसलमान इसे कभी समझ नहीं पाए.

- लेखक Vikram Chauhan स्वतंत्र पत्रकार है, उपरोक्त विचार उनके निजी विचार है.

 

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