Saturday, 23 May 2020

लॉकडाउन : भूख और तकलीफ से तंग आकर मजदूर के बेटी ने की आत्महत्या


लॉकडाउन : भूख और तकलीफ से तंग आकर मजदूर के बेटी ने की आत्महत्या
महाराष्ट्र - नांदेड : पिता मजदूरी कर के घर परिवार चलाते है, लॉकडाउन के कारण शहर में फंसे पिता को नहीं मिला काम, घरमे राशन नहीं, खाने के लाले पड़े हुए और ऊपर से किडनी लीवर की शिकायत. इलाज के लिए नहीं पैसे, इस सभी परेशानियों से झूज रहा था केंद्रे परिवार. इस सभी समस्याओं से तंग आकर नांदेड जिले के मलाकोली गाँव की अव्जवान लड़की वर्षारानी केंद्रे ने 20 मई की रात 11:20 को आत्महत्या कर अपनी जिदगी का सफ़र ख़त्म किया. सोचिये परिवार पर क्या बीती होगी और उस असहाय मजबूर पिता पर भी क्या गुजरी होगी.

वर्षारानी कई सालो से किडनी और लीवर की बिमारी से परेशान थी. उसके आलाक की वजह भी यही बिमारी ही थी. पिता भगवान केंद्रे मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे. लेकिन कोरोना के कारण देशभर में लॉकदो लागु किया गया. वर्षा के पिता मजदूरी करने के लिए गाँव से 500 किलोमीटर दूर पुणे गए हुए हे. और लॉकडाउन के वजह से काम अहि मिला और तीन महीने से पुणे में ही फंसे हुए थे. इधर उनके परिवार ने काफी परेशानियों का सामना करते हुए पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद से 2 महीने मुश्किल से गुजारे. कभी भरपेट खाते तो कभी भूके रहते. लेकिन तीसरे महीने में इस परिवार पर तंगी का पहाड़ टूट पडा. ऐसी परिस्थिति में दवाई के लिए पैसे कहाँ से आयेंगे ? और वर्षाराय की तकलीफ बढती ही चली गयी. वर्षा रानी तलाक के बाद अपने पिता के घर ही रहती थी. और पिता पुणे सिटी में मजदूरी कर गाँव पैसा भेजते थे. इसी बिच राशन पानी की किल्लत, खाने पिने के लाले, काम बंद, पिता परदेस फंसे हुए, दवाई के अभाव से किडनी लीवर की तकलीफ. इन साड़ी परेशानियों से तंग आकर एक पिता की नवजवान लड़की लॉकदो का शिकार हुई.  20 मई की रात 11:20 बजे अपने ही घर में फांसी लगाकर अपनी जिंदगी को वर्षा रानी ने अलविदा कहा.
पिता की गरीबी, रहने को घर नहीं, लॉकडाउन के वजह से मजदूरी का काम नहीं, सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं, इस वजह से मजदूरी कर के अपनी गुजरान करने वाले कई परिवार भुखमरी के कगार पर है. अगर इस परिवार को भी कहीं से मदद मिल जाती या किसी तरह पिता घर वापस आजाते तो कुछ ना कुछ व्यवस्था हो ही जाती लकिन ऐसा नहीं हुआ जिसकी वजह से एक नौजवान लड़की को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पडा. नजाने ऐसे कितने मजदूर परिवार है जो अपने घरों में भूक से तड़प रहे है.

वर्षारानी के मौत की खबर मिलते ही प्रहार जनशक्ति पार्टी के सचिन ढवले इन्होने वर्शारानी के पिता भगवान् केंद्रे को पुणे से अपने गाँव मलाकोली भेजने के लिए मदद की. और एक जान जाने के बाद प्रशासन ने भी तत्काल परमिशन दी. निजी वाहन की व्यवस्था का के उन्हें गाँव भेजा गया. आपको बता दें की शासन प्रशासन तभी ज्सागता है जब कोई अनहोनी घटना घटती है. महाराष्ट्र का ब्सहुचार्चित मामला जिसमे 16 मजदूर ट्रेन की चपेट में आकार मारे गए थे, जिन्दा तझे तब वे मज़बूरी में ट्रेन की पटरी से पैदल चलकर गाँव जसा रहे थे. ट्रेन क चपेट में आकर मरने के बाद उनकी लाशों को स्पेशल ट्रेन से गाँव भेजा गया और ज़िंदा रहते जिस शासन प्राशास ने 300 रुपये का टिकिट देकर गाव नहीं भेजा उस प्रशासन ने मजदूरों की मौत के बाद प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की. बाकी आप सब जाते है.

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