Sunday, 3 July 2016

राजिव शर्मा की आतंकियों के लिए नफरत की आग और पैगम्बर (s.) की सच्चाई से मुहब्बत

इस्लाम में रमजान माह को बहुत पवित्र माना जाता है। हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के जीवन में ऐसी कई महत्वूपर्ण घटनाएं हुई थीं जिनका संबंध रमजान से है।

रमजान ही वह महीना है जिसमें एक नेकी का बदला कई गुणा होकर वापस लौटता है। इस महीने की कई-कई खूबियां हैं। रमजान में कैदियों से अच्छे सलूक का वायदा लेकर उन्हें रिहा करते देखा गया है। यहां तक कि अक्षम्य अपराधियों को भी रमजान में फांसी नहीं दी जाती।

अभी रमजान चल रहा। बांग्लादेश के ढाका शहर में आतंकियों ने इस महीने में जिस तरह नरसंहार किया, उसके बाद मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि - तुम किस खुदा, किस दीन और किस किताब की बात कर रहे हो?
तुमने लोगों को सिर्फ इसलिए मार दिया क्योंकि उन्हें कुरआन की आयत नहीं आती थी! कुरआन में कहां लिखा है कि जिसे आयतें याद न हों उसे मार दो? और कुरआन पर हमसे सवाल पूछने वाले तुम हो कौन? तुम्हें तो सिर्फ कत्ल का एक बहाना चाहिए था।

आखिर हम लोग इनके सामने इतने बेबस क्यों हैं? मैं ढाका हमले में दिवंगत तारिषी जैन और सभी नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि देता हूं। साथ ही भारत सरकार से यह आग्रह करता हूं कि हम भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार, बीमारी सब बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन लाचारी बर्दाश्त नहीं कर सकते।

दहशत का जो खूनी खेल हमारे चारों ओर चल रहा है, उसमें अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। सबसे पहले आतंकवाद और धार्मिक अतिवाद फैलाने वालों की कमर तोड़ी जाए।

मैं ISIS और दुनिया के तमाम आतंकी संगठनों को चुनौती देता हूं कि ढाका में जिन लोगों से कुरआन को लेकर सवाल पूछे गए और कत्ल कर दिए गए, वे सवाल मुझसे पूछे जाएं।

मुझसे पूछें कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद (सल्ल.) क्या पैगाम लेकर आए थे। तुम औरतों, बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों को कत्ल करने में शान समझते हो। जरा किताबें खोलकर तो देखो - हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने अपनी जिंदगी में कभी किसी पर हाथ नहीं उठाया था।

इन लोगों की हरकतों की वजह से आज दुनिया का आम और निर्दोष मुसलमान का जीना मुश्किल हो गया है। गुनाह कोई और करता है, लोग शक की निगाहों से किसी और को देखते हैं।

दुनिया को इन शैतानों से अब जल्द आजाद कराया जाए और ये जहां मिलें, इन पर कोई रहम न किया जाए।
राजिव शर्मा









गांव का गुरुकुल से

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