Saturday, 1 February 2020

पर्दे के पीछे की कहानी : NRC में नाम मौजूद, फिर भी मुस्लिम परिवार का घर तोड़ कैंप में भेज दिया

एन आर सी वा सीएए के खिलाफ देश भर मे विरोध प्रर्द शन किया जा रहा है लेकिन सर कार ना ही बात चीत और ना ही उनके बातें सुनने का प्रयास करती है लेकिन आसाम जहां एन आर सी लागु किया जा चुका है जिसमें कई करोड़ रुपए खर्च होने के साथ साथ कुछ भी सिसिल नहीं हुआ। वहां पर लोगों के साथ क्या हो रहा है इसका एक उदाहरण ये मुस्लिम परिवार की कहानी है। एन आर सी में नाम मौजूद, होने के बाद भी उनके घर को गिरा दिया गया और उन्हें कैम्पों में भेज दिया गया। आसाम के सुनतपुर के रहने वाले एक मुस्लि’म परिवार जिसके पास एन आर सी के सारे काग जात थे लेकिन वोटर कार्ड किसी दुसरे शहर का था बाकी काग जात रहने के बावजूद उन्हें बाग्ला देशी करार दिया गया। 

बस इसी वजह से उनके घरों को तोड़ दिया गया आज पुरा खानदान खुले आस मान के नीचे रहने को विवश हैं। ये कहानी सिर्फ इस परिवार की नहीं है बल्कि सुनतपुर के 494 परिवारो के साथ ऐसा किया गया है। आज उनके पास घर जमीन सब कुछ रहने के बावजूद उन्हें इतनी सर्दी में खुले आसमान में रहने के लिए मजबुर किया गया। एक बुढ़े शख्स जिनकी आंखें काफि नम थी। इनका नाम मोहम्मद इब्राहिम जोकि इस शहर में रह रहे थे। पास की ही म’स्जि’द में नमाज पढ़ना कर गुजर बसर करते थे। 7-8 साल पहले पास ही के गांव हजपुर हूं यहां आए थे, और छोटी सी जमीन खरीदी और घर बनाया। लेकिन 5 दिसबर को सर कार ने उन्हें बांग्लादेशी करार देते हुए उनके घर को तोड़ दिया। ये कहते हुए बुढ़े इब्राहिम रोने लगे। ऐसी ही सैकड़ों कहानी है जिसके घर को बस यूंही तोड़ दिया गया और उनके परिजनों को कैम्पों में डाल दिया गया है। 
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उन कैम्पो में रहे सभी लोगों की आंखें नम है क्योंकि खुश पसीने से बने घर घर को तोड़ दिया गया था।एक महिला हम जिन्होंने बताया कि, उनके पास एन आर सी के सारे कागजात थे उनका नाम एन आर सी में आ भी गया लेकिन उनके पास वोटर कार्ड नहीं था। इस वजह से 20 साल से जहाँ वो रह रही थी उनके घरों को तोड़ दिया गया। इनके घरों को तोड़ने के लिए भारी संख्या में पुलिस, हाथी और बुलडोजर था। हाथी कच्चे मकानों को तोड़ता और बुलडोजर पक्के मकानों को। हिन्दुस्तान के लोगों ने कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन उनके अपने लोगों के साथ ऐसा सुलूक होगा। 

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