Sunday, 19 April 2020

हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन बनाने का काम बंद, यह है बड़ी वज़ह

हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन बनाने का काम बंद, यह है बड़ी वज़ह
हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन बनाने का काम बंद, यह है बड़ी वज़ह
कोरोना के इलाज में कारगर साबित हो रही हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वाइन का कच्चा माल पांच गुना महंगा हो जाने से फार्मा कंपनियों ने इसका उत्पादन बंद कर दिया है। दवा के कच्चे माल (एपीआई) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य के ड्रग कंट्रोलर ने ड्रग कंट्रोलर जनरल को पत्र लिखा है।

फार्मा उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने बताया कि हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वाइन की 100 गोलियों का मटीरियल पहले 180 रुपये में मिलता था। लेकिन अब यह बढ़कर 1100 रुपये हो गया है। बाजार में हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के कच्चे माल की खासी कमी है। इसलिए जिनके पास थोड़ा बहुत माल है, उन्होंने कीमतें बढ़ा दी हैं।

5.6 रुपये तय की गई है टैबलेट की कीमत : रुड़की फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वाइन की एक गोली की कीमत पांच रुपये छह पैसे तय की है। ऐसे में अब मटीरियल महंगा होने की वजह से इस दर पर फार्मा यूनिटों के लिए दवाई का निर्माण संभव नहीं है।

हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वाइन की डिमांड अचानक बढ़ गई है। इस वजह से कच्चा माल महंगा हो गया है। लॉकडाउन के कारण माल की आपूर्ति मुश्किल से हो रही है। हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वाइन के कच्चे माल का भाव पहले नौ हजार रुपये प्रति किलो था जो इस समय 55 हजार से लेकर 75 हजार रुपये तक पहुंच गया है। -अनिल शर्मा, अध्यक्ष, हरिद्वार फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन

एपीआई बनाने वाली कंपनी खुद बना रही टैबलेट : देहरादून फार्मा मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद कलानी ने बताया कि, हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन का एपीआई बनाने वाली कंपनी इफ्का, कैडिला आदि इस दवा का निर्माण बड़े स्तर पर खुद करती हैं। ऐसे में वह दूसरों को माल देने की बजाए खुद ही उत्पादन कर रही हैं।

हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के एपीआई की आपूर्ति में दिक्कतें आ रही है। इस संदर्भ में देश के ड्रग कंट्रेलर जनरल को पत्र लिखा गया है। हमारा प्रयास है कि राज्य में एपीआई की आपूर्ति बनाई जाए ताकि स्थानीय स्तर पर भी दवाई का निर्माण हो सके। - ताजबर जग्गी, ड्रग कंट्रोलर

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