Tuesday, 30 June 2020

नन्हे बेटे को सीने से लिपटा बिलखता रहा पिता, मां हाल पर बहा रही थी आंसू

नन्हे बेटे को सीने से लिपटा बिलखता रहा पिता, मां हाल पर बहा रही थी आंसू
बच्चे को तेज बुखार और गले में सूजन होने के चलते दंपति भागता हुआ अस्पताल पहुंचा। लेकिन वहां डॉक्टरों ने उनके बेटे को छूने से इनकार कर दिया और बच्चे को 90 किलोमीटर दूर कानपुर ले जाने के लिए कहा।


उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 123 किलोमीटर दूर कन्नौज शहर से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां एक शख्स के अपने एक साल के बच्चे के शव से लिपटकर अस्पताल में रोने का वीडियो सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो में एक शख्स अपने मृत बच्चे को सीने से चिपकाये फूट-फूटकर रो रहा है। वहीं पास ही बैठी उसकी पत्नी भी बुरी तरह रो रही है।


रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे को तेज बुखार और गले में सूजन होने के चलते दंपति भागता हुआ अस्पताल पहुंचा। लेकिन वहां डॉक्टरों ने उनके बेटे को छूने से इनकार कर दिया और बच्चे को 90 किलोमीटर दूर कानपुर ले जाने के लिए कहा। पीड़ित पिता ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाया है। बच्चे के पिता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने उसके बच्चे का वक़्त पर इलाज नहीं। अगर वे उसका इलाज़ करते तो वह आज ज़िंदा होता। लेकिन अस्पताल का कहना है कि बच्चा वायरल इन्सेफेलाइटिस का शिकार था और बहुत गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। उसे इमरजेंसी में भर्ती कर डॉक्टर से इलाज कराने की कोशिश की गई लेकिन आधे घंटे में ही उसकी मौत हो गई।


बच्चे के माता पिता का नाम प्रेमचंद हैं वे कन्नौज के मिश्री गांव के रहने वाले हैं, उन्होंने कहा कि ज़िला अस्पताल में कोई डॉक्टर उसके बच्चे का इलाज करने को तैयार नहीं था। पिता ने बताया कि उनके बेटे को बुखार और गले में सूजन थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चे को छूने से मना कर दिया और कानपुर में किसी बड़े अस्पताल में लेकर जाने को कहा। जिसके बाद वह परेशान होकर बाहर घुमने लगा तभी कुछ मीडिया वाले आ गए। इसके बाद अस्पताल ने बच्चे को तुरंत भर्ती लिया लेकिन फौरन ही उसकी मौत हो गई।


प्रेमचंद का कहना है कि वह ग़रीब आदमी है इसलिए वो अपने बच्चे को कानपुर इलाज के लिए नहीं ले जा सका। इस मामले पर कन्नौज के डी एम राकेश कुमार मिश्रा का कहना है कि उन्होंने अस्पताल केसीएमएस से इस बारे में तफ्तीश की थी। पहली नज़र में इसमें अस्पताल की गलती नहीं लगती है। बच्चा अस्पताल में ज़्यादा गम्भीर हालात में लाया गया था इसलिए उसकी मौत हो गई। (जनसत्ता से साभार)

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